प्रतीक्षा

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01 May '24
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"मन में इतनी प्रतीक्षा हमेशा बचाकर रखो
जहाँ कभी भी लौटकर आया जा सके

ये आने वाला..
तुम्हारा कोई ख़्वाब हो सकता है
जिसे तुमने बरसों पहले पीछे छोड़ दिया
हालातों से हारकर
मगर..मन की खिड़की पर हर रात
उसकी थाप तुम्हें सोने नहीं देती

ये आने वाला..
तुम्हारा कोई अपना हो सकता है
जिससे दो पल की नाराज़गी ने तुम्हारे रास्ते अलग कर दिए
मगर..आज भी तुम्हारे गालों पर आंसुओं की
सूखी दो रेखाएं गवाह हैं कि..
तुम किसी को बेहद प्रेम करते हो

ये आने वाला..
हो सकता है वक़्त का कोई ठहरा हिस्सा
जो जकड़ा है आज भी तुम्हारी खुली हथेलियों की
अदृश्य बंद मुट्ठियों में
जिस पर उम्र की चांदी बिखर गयी सिर्फ़ इस उम्मीद में
कि..तुम उसे होंठों से चूम कर
बिना किसी शिक़ायत के आज़ाद कर दो...

प्रतीक्षा हमेशा पीड़ा नहीं देती..
हमेशा नकारात्मकता नहीं देती
प्रतीक्षा मन की सीलन के लिए
मुट्ठी भर धूप जैसी होती है
जो....उम्मीद देती रहती है कि..
"हमारे जीवन का सबसे सुंदर हिस्सा अभी बाकी है.."

Category:Poetry



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Written by Aishwary raj