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तकनीकी कौशल और मानव

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01 Jun '24
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भारत को आज़ाद हुए कई दशक बीत चुके हैं और भारत बिना थके अपने विकास के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहा है। जब भी भारत को किसी हुनर ​​की आवश्यकता पड़ी, उसके नागरिकों ने बहुत ही कम समय में अपने देश की आवश्यकताओं के अनुसार खुद को ढाल लिया। एक समय भारत के एक शहर कानपुर को 'एशिया का मैनचेस्टर' की उपाधि मिली हुई थी, क्योंकि उस समय विकास की सीढ़ियाँ चढ़ने के लिए देश को बड़े-बड़े उद्योगों और बड़ी-बड़ी मिलों/कारखानों और उनमें काम करने के लिए हुनरमंद लोगों की आवश्यकता थी। ऐसे में हमारे देश के नागरिकों ने अपना हुनर ​​दिखाया और हर क्षेत्र में विश्व प्रसिद्ध और हुनर ​​से भरपूर संस्थानों के विकास में शामिल हुए। जिनमें मुख्य रूप से - राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम, रॉयल एनफील्ड, ईएमसीओ बैटरीज, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पश्चिम बंगाल इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड और टाटा स्टील ऐसे कई उद्योग स्थापित हुए देश के नागरिकों, मुख्य रूप से युवाओं ने इस क्षेत्र में खुलकर अपने दिमाग और कौशल का इस्तेमाल किया, जिसकी मदद से भारत के अति संवेदनशील संस्थान जैसे डीआरडीओ, एचएएल और अन्य रक्षा संस्थान, इसरो आदि ने छलांग लगाकर तरक्की की और भारतीयों ने पूरी दुनिया में अपने कौशल का लोहा मनवाया और इसी तकनीकी कौशल के बल पर भारतीयों ने अग्नि और ब्रह्मोस जैसी लंबी दूरी की मिसाइलें भी बनाईं और अंतरिक्ष विज्ञान भी इससे अछूता नहीं रहा, भारत ने अंतरिक्ष में अपने उपग्रह स्थापित करना शुरू कर दिया, आज इन्हीं तकनीकी क्षमताओं के कारण भारत अपने मून रोवर को चंद्रमा की अंधेरी सतह पर उतारने में सक्षम हुआ, इसके अलावा भारत अन्य देशों के उपग्रहों को भी प्रक्षेपित करता है, इसलिए दूसरों की तुलना में यह सबसे सस्ती लागत पर उपग्रह प्रक्षेपित करने वाला देश बन गया है। 

आज भारत अपने तकनीकी कौशल के बल पर दुनिया के उन्नत देशों में अपनी पहचान बना चुका है। आज इन्हीं कौशलों के परिणामस्वरूप गूगल जैसी कंपनियों में शीर्ष अधिकारियों में भारतीय शामिल हैं। भारतीय अपने तकनीकी कौशल के बल पर दुनिया भर के कई देशों में काम कर रहे हैं और देश का नाम रोशन कर रहे हैं। आज समय आ गया है कि हम अपने देश को एक बार फिर विश्व पटल पर स्थापित करें, क्योंकि आज एक आर्थिक युग की शुरुआत हो चुकी है और भारत के लिए एक बार फिर खुद को साबित करने का समय आ गया है। आज इन आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह स्वयं को तकनीकी कौशल से सुसज्जित करे और वर्तमान समय की मांग को देखते हुए देश के विकास में अपना योगदान दे, तथा कुछ तकनीकी/यांत्रिक कौशल प्राप्त करके अपने परिवार के साथ-साथ देश का भी विकास करे। 

आज हमारा देश विकासशील देश तो है, लेकिन विकसित नहीं है। आज हमें फिर से ऊंची उड़ान भरनी है, और स्वयं को तथा अपने देश को उन विकसित देशों की श्रेणी में खड़ा करना है, जो कभी-कभी हमारी ओर गुस्से भरी नजरों से देखने से भी नहीं कतराते। हमारे लिए पूरी दुनिया को अपनी ताकत का एहसास कराना बहुत जरूरी है, और वह तभी संभव है, जब हम स्वयं को तकनीकी कौशल से भर लें, ताकि देश में कोई बेरोजगार न रहे, कोई भूखा न सोए, और किसी को किसी के सामने भीख न मांगनी पड़े। जब हम स्वयं पर निर्भर हो जाएंगे, तो देश भी आत्मनिर्भर हो जाएगा, और किसी की भी कठोर नजरों को अपने सामने झुकाने में सक्षम हो जाएगा। निश्चित रूप से हम उस युग में जी रहे हैं जहाँ हमें पूरी दुनिया को "वसुधैव कुटुम्बकम" की भावना से देखने की आवश्यकता है। 

आज हमारे हाथ में ऐसे उपकरण हैं जिनकी वजह से पूरी दुनिया हमारी मुट्ठी में आ गई है और हमारे बीच की भौगोलिक दूरियाँ कम हो गई हैं, लेकिन इस वैश्विक तकनीकी विकास का एक नकारात्मक पहलू भी है। मनुष्य अपनी बुद्धि और भावनाओं को खो रहा है, वह अकेला हो गया है और अपनी सरलता और मासूमियत को भूल गया है और ये मशीनी उपकरण मानव मस्तिष्क को अपना आदी बना रहे हैं। जिसका ताज़ा उदाहरण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है जो इन मशीनों को बुद्धिमान बना रहा है और मनुष्य इस सफलता से खुश हो रहा है। आज मैं अपनी भावनाओं और शब्दों का उपयोग करके यह निबंध लिख रहा हूँ लेकिन कल यह संभव है कि मशीन वही काम करने लगे, बल्कि वह कर रही है और यह मनुष्य के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही है, क्या भविष्य में यह तकनीक मनुष्य पर राज करेगी? क्या ये तथाकथित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मशीनें कौशल को अपने कब्जे में ले लेंगी? क्या मानव जाति को अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करना पड़ेगा?

Bharat Singh Tomar 

 

Category:Science and Innovation


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Written by Bhaarat Tomar