Do you have a passion for writing?Join Ayra as a Writertoday and start earning.

परछाई

ProfileImg
09 May '24
1 min read


image

               

 

        परछाई

मेरी ही परछाईं मुझसे

अब यें पूछ रही है

कौन हूँ मैं क्या नाम है मेरा

क्यों मैं तेरे संग डोल रही हूँ

हर आहट होने पर भी मैं

क्यों तेरे संग चौंक रही हूँ

दिन का उजियारा हों

या रात का अंधियारा

फिर भी तेरे संग डोल रही हूँ


 

कभी तुझ से छोटी

तो कभी तुझ से बड़ी

कभी तुझ से दूर

तो कभी तुझ में हीं

सिमट रही हूँ

मंज़िल एक होने पर भी क्यों

अपना रास्ता खोज रही है

मेरी ही परछाईं मुझ में

अब अपना अक्स ढूँढ रही है

कौन हूँ मैं क्या नाम है मेरा

क्यों मैं तेरे संग डोल रही हूँ ।।


 


 

                                       स्नेह ज्योति

Category : Poem


ProfileImg

Written by Snehjyoti Chaprana

कभी आंसमा में ढूँढता हैं कभी सपनों में खोजता हैं यें दिल हर पल ना जाने क्या-क्या सोचता है भीड़ मे तन्हाई में अपने को ही खोजता हैं