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राजगढ़ जेल में लगाई गई अच्छाई की पाठशाला

बंदियों ने गायत्री मंत्र के बदले त्यागी अपनी बुराई,किया गया पुस्तकालय का शुभारंभ

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16 May '24
3 min read


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देश की लगभग 108 जेलो में पुत्स्कालय खोलने का संकल्प लेकर चल रहे अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के द्वारा 37 वे पुस्तकालय का शुभारंभ राजगढ़ जिला जेल में किया गया,वही अच्छाई की एक पाठशाला भी आयोजित की गई जिसमे जिला जेल में बंद बंदियों को अपनी बुराई त्याग कर गायत्री मंत्र को अपने जीवन और दिनचर्या का हिस्सा बनने की सीख दी गई,वही उक्त पुनीत कार्य  में स्वर्गीय श्याम प्रकाश विजयवर्गीय उर्फ शंभू दादा के परिजनो ने भी हिस्सा लिया और उनकी स्मृति में जिला जेल को एक अलमारी भेंट की गई।


जानकारी के मुताबिक अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में देशभर की जेलों में गायत्री परिवार द्वारा रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बंदी भाईयों के मानसिक चिंतन को बदलने का एक बड़ा प्रयास किया जा रहा है,उसी क्रम में मंगलवार को जिला जेल राजगढ़ में भी कैदी भाईयों को नियमित स्वाध्याय के लिए गायत्री परिवार द्वारा परम पूज्य गुरुदेव पं.श्रीराम शर्मा आचार्यजी के द्वारा रचित साहित्य की स्थापना की गई ,और गायत्री परिवार के सदस्यों ने जेल मे ज्ञानवर्धक पुस्तकालय का शुभारंभ किया गया।


वही जिला जेल राजगढ़ मे केदियो के लिए स्वास्थ विभाग मे कार्यरत रहे स्वर्गीयश्याम प्रकाश विजयर्गीय निवासी किला मोहल्ला राजगढ़ ,जिन्हे शंभू दादा के नाम से भी जाना जाता था उनकी स्मृति में उनके पुत्र ऋषि और राहुल विजयवर्गीय ने बंदियों के इस्तेमाल के लिए अलमारी भेंट की,वही डॉ राहुल विजयवर्गीय ने अपने संबोधन में कहा की केदियो के लिए दी गई ये पुस्तके उनके जीवन मे सुधार करके, समाज के कल्याण के एक बड़ा बदलाव लाएगी।


बंदी साधना अभियान के प्रभारी प्रेमलाल कुशवाह ने सभी बंदी भाईयों को संबोधित करते हुए कहा कि,सबसे पहले आपकी एक बुराई मुझे दे दें मैं आपकी बुराई को मां नर्मदा में विसर्जित कर दुंगा, तथा इस बुराई के बदले आप एक अच्छाई के रूप में गायत्री मंत्र की साधना ग्रहण करें,कुशवाह ने आगे कहा कि, गायत्री मंत्र का बड़ा प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है,और सकारात्मक सोच बढ़ती है, इसलिए हमारे परिवार के सभी सदस्यों को गायत्री मंत्र से अनिवार्य रूप से जुड़ना चाहिए, तथा इसका लाभ उठाना चाहिए,साथ ही कुशवाह ने यह भी कहा कि,देश की 108 जेलों में पं. श्रीराम शर्मा आचार्य पुस्तकालय की स्थापना हमारा संकल्प हैं, ओर जिला जेल राजगढ़ में  यह 37 वा पुस्तकालय हैं।


उप जोन प्रभारी आर पी हज़ारी ने बंदी भाईयों को संबोधित करते हुए कहा कि,नशा, नाश की जड़ है, इससे जाने अनजाने में कई अपराध हो जाते हैं, इसलिए हमें नशे से दूर रहना चाहिए,उन्होंने आगे कहा की,जैसे बछड़े एक हज़ार गायो मे अपनी माँ  को ढूंढ लेता हे,वैसे गलत कार्य करने वालो को उसके कर्म भी ढूंढ लेते हे,इसलिए हमें अपने जीवन की बुराई को त्यागना हे।


इसके अतिरिक्त जिला जेल के मुख्य प्रहरी प्रमुख अमरसिंह सोलंकी ने बंदियों के जीवन में सदसाहित्य से सुधार हो इस हेतू गायत्री परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं दी,उन्होंने कार्यक्रम के  अवसर पर कहा की ऐसे कार्यक्रमों से एक ऊर्जा का संचार होता हे,योग शिक्षक लखन चौहान ने बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्यजी के सदसाहित्य से आपके जीवन में निश्चित ही परिवर्तन होगा यह मेरी गारंटी हैं क्योंकि परम पूज्य गुरुदेव के सदसाहित्य से लाखों करोड़ों लोगों के जीवन में परिवर्तन आया है और वे सन्मार्ग की ओर बड़े हैं । कार्यक्रम की शुरुआत में आर पी हज़ारी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गुरू पूजन कर पं. श्रीराम शर्मा आचार्य पुस्तकालय की स्थापना की गई ,कार्यक्रम में गायत्री परिवार के वरिष्ठ परिजन, जेल प्रशासन का स्टॉफ सहित बंदी भाई उपस्थित थे l

Category:News


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Written by Abdul Wasim Ansari

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