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pyara सा احساس

Part (2)

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08 May '24
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           pyara सा احساس

           Part (2) 

यजदानी हाऊस अज़ीम यज़दानी की आला तरबियत का मुंह बोलता सुबूत था जो उनके बच्चों फरहान, उसमान  और अहसन और उनकी फैमिलीज़ से आबाद था। तीनों भाइयों में बहुत मुहब्बत थी। सबसे बड़े फरहान यजदानी जिनके चार बच्चे थे । बड़ी मलीहा और छोटे वलीद, रूहान और शायान । उनसे छोटे उसमान यजदानी जिनके दो बच्चे सनाया और शहीर थे सबसे छोटे अहसन यजदानी थे जिनके तीन बच्चे अहमर महीरा और उज़मा थे।
महीरा और सनाया B.A थर्ड इयर में थी जबकि उजमा का अभी B.A फर्सट इयर ही था। और मलीहा M.A करने के बाद अब घरदारी में माँ का हाथ बँटा रही थी। इधर लडको में शायान और रूहान B.S.C कर रहे थे। जबकि शहीर इंजीनियरिंग के फर्सट इयर में था और अहमर अभी  टवेल्थ कर रहा था। और वलीद बिजनेस मैंनेजमैंट से M.B.A करने के बाद अब पापा के साथ बिजनेस में लगा हुआ था।
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“वलीद फ्री हो क्या”…? ? ?? 
आज सनडे था इसलिए ऑफिस का ऑफ था वह आराम करने की गर्ज़ से बैठा ही था कि बाहर से चचीजान की आवाज़ पर फिर से उठना पड़ा। 
"जी कहें" ..???? 
"सनाया को कुछ किताबें मंगानी थी तो जरा उसकी साथ चले जाओगे".???? 
"ओके आप उसे कहें तैयार रहे" !!!! 
वह कहता पोर्च की जानिब बढ़ रहा था कि सनाया के इंकार की आवाज़ पर रूक गया। 
"रहने दें अम्मी कल कॉलेज से वापसी पर लेती आऊंगी मैं" !!!
"ठीक है जैसी मर्ज़ी तुम्हारी, सुबह से तो वावेला मचाया हुआ था और अब नही लानी है। वली जाओ बच्चे आराम कर लो तुम भी" !!! 
चचीजान सनाया को हलकी सी डान्ट लगा कर अब उस्से मुखातिब थीं।
“चची जान एक कप कॉफी भिजवा दें प्लीज़” !!! 
उसने उनको किचन की तरफ बढ़ती देख कर कहा तो वह भी अस्बात (हाँ) में सर हिला कर चली गईं।
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To Be Continued….. 

© Afariya Faruqui



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Written by Afariya Faruqui

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