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मां की अग्नि परीक्षा,जानिए क्यों

परीक्षा का महत्व क्या होता है,कोई जरा इनसे पूछे,प्रसव के अगले दिन ही आराम करने की बजाय 20 किलोमीटर का सफर तय करके परीक्षा देने पहुंची प्रसूता

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26 May '24
3 min read


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मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले से एक महिला के जज्बे,जोश और जनून का एक ऐसा उदाहरण सामने आया हैं जिसे शब्दो में बयां कर पाना मुश्किल है,क्योंकि जिन पलो में महिलाए अपने आपको मौत और जिंदगी के दरमियान देखती है उन पलों के बीच एक प्रसूता, प्रसव के अगले दिन ही परीक्षा देने के लिए 20 किलोमीटर का सफर तय करते हुए परीक्षा देने के लिए पहुंच गई,जो की जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है।


जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को शासकीय महाविद्यालय पिपरई में प्रसव के एक दिन बाद परीक्षा देने पहुंची एक महिला परीक्षार्थियों के बीच आकर्षण का केंद्र रही, मनीषा अहिरवार जो की  मुंगावली की निवासी है उन्होंने अपने प्रसव के दूसरे दिन होने वाली परेशानियों को नजर अंदाज करते हुए परीक्षा दी है,वेब बीए अंतिम वर्ष की छात्रा है।

आपको बता दें कि अशोकनगर जिले की पिपरई गांव के शासकीय महाविद्यालय में शुक्रवार को बीए अंतिम वर्ष के लिए डिजिटल मार्केटिंग की परीक्षा आयोजित की गई थी,और  इस परीक्षा में अन्य परीक्षार्थियों के साथ एक प्रसूता ने भी अपना पर्चा हल किया ,उक्त परीक्षा में बैठने के लिए प्रसूता मनीषा अहिरवार ने नगर से 20 किलोमीटर दूर मुंगावली के सिविल अस्पताल में प्रसव वार्ड से विशेष अनुमति ली और महाविद्यालय द्वारा भी प्रसूता की स्वास्थ व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए उसे पर्चा हल करने के लिए अलग से बैठक व्यवस्था कराई ताकि परीक्षा के दौरान उसके स्वास्थ पर कोई दूषित प्रभाव न पड़े इसके लिए प्रबंधन के द्वारा प्रसूता को पंखे व उबले हुए पानी की व्यवस्था भी कराई गई,प्रसूता ने ढाई घंटे में अपना पर्चा अपना हल किया और वापस 20 किलोमीटर की दूरी तय करके अस्पताल के वार्ड में अपने बच्चों के पास पहुंच गई।


गौरतलब है कि,बीते गुरुवार को प्रसव पीड़ा के बाद मनीषा को मुंगावली सिविल अस्पताल के  प्रसव वार्ड में भर्ती कराया गया था, जहां उसने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया,अगले दिन यानी की  शुक्रवार को उसकी परीक्षा थी इसलिए मनीषा ने पहले महाविद्यालय प्राचार्य से फोन करके उसकी परीक्षा आगे बढ़ाने की बात की लेकिन प्राचार्य ने असमर्थता जताई तो वह अपने परिवारजनों के साथ शुक्रवार को महाविद्यालय में पेपर देने  के लिए पहुंच गई और पर्चा हल किया,इसके लिए उसे सिविल अस्पताल से विशेष अनुमति लेनी पड़ी।

 

छात्रा मनीषा अहिरवार ने मीडिया को बताया कि, हमने साल भर तो पढ़ाई की थी,पर डिलीवरी होने के कारण हम पेपर देने से इंकार करके हमारी साल भर की पढ़ाई को बेकार नहीं कर सकते थे,और  साल को भी वरवाद नही करना चाहते थे,आखिरी पेपर से भी हम क्यों चुके इसलिए पेपर देने के लिए हम डिलीवरी के बाद भी पहुंचे,मनीषा ने आगे बताया कि, अगर कोई भी लड़कि यां महिला इस तरह की परेशानी मैं हो तो वह भगवान के भरोसे अपना कार्य कर सकती है, और मैं वह अपने कार्य में मन लगाएगी तो उसका कार्य सफल ही  होगा कोई भी उसमें बाधा नहीं आएगी

वही उक्त मामले में पिपरई महाविद्यालय प्रभारी प्राचार्य राजमणि यादव का कहना  है की,उक्त छात्रा का एक दिन पहले फोन आया था, जिसमैं छात्रा मनीषा अहिरवार स्वयं परीक्षा देने आई तो पता चला कि उसका एक दिन पहले ही प्रसव हुआ है, पेपर से बढ़कर जीवन हैं और मनीषा ने साहस दिखाया हमने उसके स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा,छात्रा के इस कदम को देखकर कहा जा सकता है कि,शिक्षा के प्रति अधिक प्रतिबद्धता की बात है यदि देश के प्रत्येक महिला में आ जाए तो भारत को विश्व गुरु बनने से कोई नही रोक सकता।

 

Category:News


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Written by Abdul Wasim Ansari

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