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जानिये, विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर चौंकाने वाली बातें!

खाद्य सुरक्षा के लिए कौन सी बातों का रखें ध्यान?



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  1. विश्‍व खाद्य सुरक्षा दिवस प्रतिवर्ष सात जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। यूएनओ की जनरल असेंबली ने 20 दिसंबर 2018 को फूड सेफ्टी डे मनाने का फैसला किया और इसके लिए 7 जून की तारीख तय की थी। खाद्य और कृषि संगठन और विश्व स्वास्थ्य संगठन  के संयुक्त प्रस्ताव के बाद, संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दिसंबर 2018 में विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस की स्थापना की गई थी।
  2. 7 जून 2019 को पहली बार विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस मनाया गया।
  3. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों को खाद्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी देने और इसके  बारे में जागरूक है। इसके साथ ही खाना बर्बाद न करना और ऐसा खाना उपलब्ध कराना जो स्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षित हो, इसका मुख्य उद्देश्य है।
  4. विश्‍व खाद्य सुरक्षा दिवस की शुरुआत 2019 में हुई थी। 
  5. विश्‍व खाद्य सुरक्षा दिवस की इस वर्ष 2024 की थीम - “सुरक्षित भोजन बेहतर स्वास्थ्य” है। 
  6. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर साल वैश्विक तौर पर में से एक दस में से एक व्यक्ति दूषित खाना खाकर बीमार पड़ते हैं।
  7. कई बीमारियों खाने में बैक्टीरिया, वायरस, पैरासाइट और कैमिकल्स की उपस्थिति के कारण होती है। 
  8. भारत सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 लागू किया है, जो देश के गरीब और वंचित वर्गों को सस्ती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराता है।
  9. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण  खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा की निगरानी करता है।
  10. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, विश्व में 10 में से लगभग 1 व्यक्ति (अनुमानित 600 मिलियन लोग) दूषित भोजन खाने के बाद बीमार हो जाते हैं तथा प्रतिवर्ष 420 000 लोगों की मृत्यु हो जाती हैं। 
  11. 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे खाद्य जनित रोग के भार का 40% वहन करते हैं, जिसमें प्रतिवर्ष 1,25,000 लोगों की मृत्यु होती है।
  12. हर साल चार लाख से अधिक लोगों का जीवन दूषित भोजन लील रहा है। 
  13. हर साल पांच साल से कम उम्र के 40 फीसदी बच्चे दूषित भोजन के कारण बीमार पड़ते हैं, जिसमें से 1,25,000 की मौत हो जाती है।
  14. संयुक्‍त राष्‍ट्र के अनुसार प्रतिवर्ष दूषित भोजन के कारण होने वाली बीमारियों के लगभग 60 करोड़ मामले सामने आते हैं। 
  15. असुरक्षित भोजन मनुष्य के स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्थाओं के लिए खतरा है, जो कमजोर और हाशिए पर रहने वाले लोगों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों, संघर्ष से प्रभावित आबादी और प्रवासियों को असमान रूप से प्रभावित करता है।
  16. दुनिया भर में हर साल लगभग 4,20,000 लोग दूषित भोजन खाने से मर जाते हैं। हर साल पांच साल से कम उम्र के 40 फीसदी बच्चे दूषित भोजन के कारण बीमार पड़ते हैं, जिसमें से 1,25,000 की मौत हो जाती है।
  17. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, दुनिया भर में हर साल दस में से एक व्यक्ति दूषित भोजन का सेवन करने के कारण बीमार पड़ता है। दूषित भोजन खाने से 200 से अधिक बिमारियां होती हैं। 
  18. हाल के अनुमानों के अनुसार असुरक्षित भोजन के कारण निम्न और मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं को हर साल उत्पादकता में लगभग 95 बिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान होता है।
  19. हर साल दुनिया भर में 1।3 अरब टन भोजन बर्बाद होता है। यह लोगों के उपभोग के लिए उत्पादित सभी खाद्य पदार्थों के एक तिहाई के बराबर है।
  20. हर साल दुनिया भर में 1।3 अरब टन भोजन बर्बाद होता है। यह लोगों के उपभोग के लिए उत्पादित सभी खाद्य पदार्थों के एक तिहाई के बराबर है।
  21. एक रिपोर्ट के अनुसार, यूके में घरों ने 2021 और 2022 के बीच 64 लाख टन भोजन बर्बाद किया। उस भोजन को उगाने और काटने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली जीवाश्‍म ऊर्जा  के साथ-साथ खेतों या लैंडफिल में सड़ने पर निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसों  को ध्यान में रखते हुए, यह बर्बादी 1।8 करोड़ टन सीओ 2 उत्सर्जन के बराबर है।
  22. हानिकारक बैक्टीरिया, वाइरस, पैरासाइट्स, या रासायनिक पदार्थों से युक्त असुरक्षित भोजन 200 से अधिक बीमारियों का कारण बन सकता है, जिसमें दस्त की बीमारी से लेकर कैंसर तक शामिल हैं।
  23. डब्ल्यूएचओ के अनुसार, प्रति वर्ष लगभग 600 मिलियन लोग भोजन करने के बाद प्रदूषित खाद्य से बीमार होते हैं, जिससे 420,000 मौतें होती हैं। 
  24. खाद्य संबंधी बीमारियाँ असहाय जनसंख्या को अधिक प्रभावित करती हैं, जिसमें बच्चे, गर्भवती महिलाएँ, बुढ़े व्यक्ति, और मौजूदा स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोग शामिल है।
  25. संघर्ष, आर्थिक झटके, चरम जलवायु और बढ़ती उर्वरक कीमतें मिलकर अभूतपूर्व अनुपात में खाद्य संकट पैदा कर रही हैं। लगभग 783 मिलियन लोग दीर्घकालिक भूख का सामना कर रहे हैं।
  26. खाद्य असुरक्षा के संकट या बदतर स्तरों का सामना करने वाले लोगों की संख्या में 2021 से 35% की तेज़ी से वृद्धि हुई है और अब यह 58 देशों और क्षेत्रों में 258 मिलियन लोगों को प्रभावित कर रहा है।
  27. तीन में से एक व्यक्ति किसी न किसी स्तर के कुपोषण से पीड़ित है।
  28. जिन देशों में तीव्र खाद्य असुरक्षा के संकट स्तरों का सामना करने वाले लोगों की संख्या सबसे अधिक है, उनमें कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य , इथियोपिया, अफ़गानिस्तान, नाइजीरिया और यमन शामिल हैं। 
  29. कुपोषण के कारण 2020 में वैश्विक स्‍तर पर 149 मिलियन बच्चे बौने थे।
  30. एक दशक की गिरावट के बाद, 2015 से विश्व में भूख बढ़ रही है। 2010 के बाद से दुनिया में इतने भूखे लोग नहीं रहे। 
  31. फरवरी 2022 में वैश्विक खाद्य कीमतें अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुँच गईं । 
  32. खाद्य एवं कृषि संगठन ने के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 में उपभोक्ताओं के लिये उपलब्ध कुल भोजन का 17 फ़ीसदी हिस्सा फेंक दिया गया और वह बर्बाद हो गया।
  33. कोविड-19 महामारी के कारण 13 करोड़ से अधिक अतिरिक्त लोगों को भोजन व पोषण असुरक्षा का सामना करना पड़ था। 
  34. विश्‍व के 81 करोड़ से अधिक लोग भूखमरी से पीड़ित हैं।
  35.  दो अरब लोगों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी है और लाखों बच्चे नाटेपन का शिकार हैं, जो पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पा रहे हैं। 
  36. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य व कृषि संगठन का कहना है कि विश्व की बढ़ती आबादी की खाद्य ज़रूरतें पूरी करने के लिए, पिछले 50 वर्षों में कृषि उत्पादन में 300 प्रतिशत वद्धि हुई है, मगर अब भी दुनिया भर में लगभग साढ़े 73 करोड़ लोग खाद्य अभाव या कुपोषण से जूझते हैं, क्योंकि विशाल मात्रा में खाद्य सामग्री का या तो नुक़सान होता है या उसकी बर्बादी होती है।
  37. भोजन को आधा-अधूरा खाकर उसे कूड़ेदान में फेंक देने की प्रवृत्ति से, भोजन बर्बादी की समस्या गम्भीर रूप धारण कर रही है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब 80 करोड़ से अधिक लोग भूखे पेट सोने के लिये मजबूर हैं। 
  38. दूषित भोजन खाने से सालाना 4 लाख से ज्‍यादा लोग अपनी जान गंवाने के लिए मजबूर हैं। 
  39. हर साल खाद्य जनित बीमारियों के अनुमानित 600 मिलियन मामलों दर्ज होते हैं। 
  40. दुनिया भर में हर साल अनुमानित 420000 लोग दूषित भोजन खाने से मर जाते हैं। 
  41. 5 साल से कम उम्र के बच्चे खाद्य जनित बीमारियों का 40 फीसदी बोझ उठाते हैं। 
  42. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की ओर से जारी खाद्य बर्बादी सूचकांक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय घरों में सालाना 68.7 मिलियन टन भोजन बर्बाद होता है। 
  43. सामान्य भाषा में कहें तो औसतन भारत का प्रत्‍येक व्‍यक्ति वर्ष में कम से कम 50 किलो भोजन बर्बाद कर कर देता है। 
  44. भारत में कुल उत्पादित भोजन का एक तिहाई हिस्सा खाने से पहले बर्बाद हो जाता है। 
  45. भारत में बर्बाद होने वाले भोजन की सिर्फ 40 फीसदी मात्रा का मूल्य 89,000 करोड़/प्रतिवर्ष है। यह भारत के सकल घरेलू उत्पाद या कहें जीडीपी के एक फीसदी के बराबर है। या कहें तो एक फीसदी के बराबर जीडीपी के बराबर भोजन सालान कूडे़दान में बर्बाद हो जाता है और वहीं लाखों लोग भूखे रहने को मजबूर हैं।
  46. फीडिंग इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार देश में लगभग 194.4 मिलियन लोग या कहें तो 14.3 फीसदी के करीब आबादी को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पा रहा है। 
  47. वहीं ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2023 की बात करें तो 125 देशों की सूची में भारत 111वें पायदान पर खड़ा है, जो देश में भूख की गंभीर समस्या को दर्शाता है।
  48. वर्ष 2022 में विश्‍व में कुल 7830 लाख लोगों को भूखे रहने को विवश होना पड़ा था। 
  49. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार साल 2022 में 6910-7830 लाख लोगों को करना पड़ा था भूख का सामना
  50. विडम्बना का विषय है कि कि देश में 23.4 करोड़ लोग कुपोषण का शिकार हैं। 
  51. संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी एक अन्य रिपोर्ट 'द स्‍टेट ऑफ फूड सिक्‍योरिटी एंड न्‍यूट्रिशन इन द वर्ल्‍ड 2002' के मुताबिक 74.1 फीसदी भारतीयों के लिए पोषण  से भरी थाली किसी लक्जरी से कम नहीं है। इसका मतलब की देश में 100 करोड़ से ज्यादा लोगों को पोषण से भरपूर आहार नसीब नहीं हो रहा है। 
  52. वर्ष 2023की  ग्‍लोबल हंगर इंडेक्‍स के मुताबिक देश की 16.6 फीसदी आबादी किसी न किसी रूप में कुपोषण का शिकार है।
  53. देश में भोजन की कमी और कुपोषण की समस्या कितनी गंभीर है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स के 125 देशों की लिस्ट में भारत को 111वें पायदान पर  रखा गया है।
  54. यदि बच्चों की बात करें तो देश में कुपोषण की समस्या कहीं ज्यादा गंभीर है। आंकड़ों के मुताबिक देश में 18.7 फीसदी बच्चे वेस्टिंग का शिकार हैं। मतलब की इन बच्चों का वजन उनकी ऊंचाई के हिसाब से कम था। यदि वैश्विक आंकड़ों से तुलना करें तो इस मामले में भारत पहले स्थान पर है, जहां स्थिति यमन (14.4 फीसदी) और सूडान (13.7 फीसदी) से भी ज्यादा खराब है।
  55. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ), विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और वर्ल्ड बैंक द्वारा जारी रिपोर्ट लेवल्स एंड ट्रेंड इन चाइल्ड मालन्यूट्रिशन 2023 के मुताबिक देश में पांच वर्ष से कम उम्र के 31.7 फीसदी बच्‍चे स्‍टंटिंग का शिकार  हैं। मतलब की यह बच्चे अपनी उम्र के लिहाज से ठिगने हैं। 
  56. आंकड़ों के मुताबिक दुनिया में स्टंटिंग से प्रभावित हर चौथा बच्चा भारतीय है। इसका अर्थ है कि भारत पांच वर्ष से कम आयु के 24.6 फीसदी स्टंटिंग प्रभावित बच्चों का घर है। 
  57. आंकड़ों की गंभीरता को आंका जाए तो देश में खाद्य पदार्थों की बर्बादी किसी अपराध से कम नहीं कही जा सकती है।
  58. संयुक्त राष्ट्र फूड वेस्ट इंडेक्स रिपोर्ट 2024 में जारी यदि वैश्विक आंकड़ों को देखें तो सालाना कुल खाद्य उत्पादन का 19 फीसदी बर्बाद हो रहा है, जो करीब 105.2 करोड़ टन के बराबर है। दूसरी ओर दुनिया में 78।3 करोड़ लोग खाली पेट सोने को मजबूर हैं।
  59. रिपोर्ट के अनुसार दुनिया का हर व्यक्ति सालाना करीब 79 किलोग्राम भोजन बर्बाद कर रहा है, जो दुनिया में प्रतिदिन 100 करोड़ थालियों जितने आहार के बर्बाद होने के बराबर है।
  60. एक रिपोर्ट में हैरान कर देने वाली बात यह सामने आई है कि एक तरफ तो जहां कई अफ्रीका देश भुखमरी का सामना कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नाइजीरिया जैसे देश भी हैं जहां हर व्यक्ति साल में करीब 113 किलोग्राम भोजन बर्बाद कर देता है। 
  61. इसी तरह मिस्र में हर व्यक्ति औसतन 163 किलोग्राम भोजन बर्बाद हो रहा है। वहीं तंजानिया में यह आंकड़ा 152 और रवांडा में 141 दर्ज किया गया है।
  62. प्रति व्यक्ति फूड वेस्ट के मामले में मालदीव सर्वोच्‍च स्‍थान पर है, जहां प्रति व्यक्ति सालाना 207 किलोग्राम फूड वेस्ट हो रहा है।
  63. सीरिया और ट्यूनीशिया में यह आंकड़ा 172, जबकि पाकिस्तान में 130 दर्ज किया गया है। 
  64. रूस में फूड वेस्ट का यह आंकड़ा सालाना 33, जबकि फिलिपींस में 26 किलोग्राम दर्ज किया गया। 
  65. बुल्गारिया में 26, भूटान में 19 और मंगोलिया में सालाना प्रति व्यक्ति 18 किलोग्राम फूड वेस्ट हो रहा है। 
  66. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की नई रिपोर्ट फूड वेस्‍ट इंडेक्‍स रिपोर्ट 2024'  में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक खाने योग्य करीब 20 फीसदी भोजन कचरे में फेंक दिया जाता है।
  67. रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक स्तर पर खाद्य पदार्थों की जो बर्बादी हो रही है उसका अधिकांश यानी 60 फीसदी घरों में बर्बाद हो रहा है। यदि घर-परिवार में बर्बाद हो रहे इस भोजन की कुल मात्रा को देखें तो वो करीब 63.1 करोड़ टन है।
  68.  वैश्विक स्तर पर पांच वर्ष से कम आयु के 15 करोड़ बच्चों का विकास इसलिए अवरुद्ध हो गया क्योंकि उनके आहार में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी है। मतलब की वो बच्चे किसी न किसी रूप में कुपोषण का शिकार हैं।
  69. भोजन की बर्बादी का प्रमुख स्रोत घर-परिवार हैं । कुल भोजन की बर्बादी में से  631 मिलियन टन के लिए जिम्मेदार घर-परिवार थे, जो 60 प्रतिशत के बराबर है, खाद्य सेवा क्षेत्र 290 मिलियन टन के लिए और खुदरा क्षेत्र 131 मिलियन टन के लिए जिम्मेदार था।
  70. भोजन की हानि और अपशिष्ट से उत्पन्न ग्रीनहाउस गैसें विश्व ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का 8-10 प्रतिशत  होने का अनुमान है। ये विमानन क्षेत्र द्वारा उत्पन्न कुल उत्सर्जन का लगभग पाँच गुना है।

विश्‍व खाद्य सुरक्षा दिवस पर ध्‍यान रखने योग्‍य विशेष बातें : 

  1. खाने को तनिक भी बर्बाद न करें। 
  2. खाद्य को सुरक्षित रखें। 
  3. स्‍वच्‍छ खाद्य पदार्थ ही खाएं। 
  4. फल या सब्ज़ी को अच्छी तरह धोकर ही खाएं।
  5. खाना पकाते समय साफ-सफाई का विशेष रूप से ध्यान रखें।
  6. खाना हाइजीनिक तरीके से बना हो तो ही उसे खाने खाएं। 
  7. मांसाहार में मांस-मच्छी, उन्हें केवल पकाकर ही खाएं।
  8. खाने की चीज़ों को सही तरीके से स्टोर करें।
  9. यदि आप दोबारा खाना गर्म करके खा रहे हैं तो एक बार उसकी गंध जरूर सूंघें।
  10. खाना बनाने से पहले हाथों की साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान दें।
  11. इतना ही नहीं खाना बनाते समय बर्तनों की शुद्धता पर भी ध्यान दें।
  12.  उत्पादन से लेकर उपभोग तक भोजन सुरक्षित रखें।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं समीक्षक हैं।)

राजेश कश्यप

स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं समीक्षक

म.नं. 1229, पाना नं. 8, नजदीक शिव मन्दिर,

गाँव टिटौली, जिला. रोहतक

हरियाणा-124001
मोबाईल. नं. 09416629889

email: [email protected] 

लेखक परिचय : हिंदी और जनसंचार में द्वय स्‍नातकोत्‍तर। गत अढ़ाई दशक से समाजसेवा एवं प्रिन्‍ट एवं इलेक्‍ट्रोनिक मीडिया के लिए स्‍वतंत्र लेखन जारी। प्रतिष्ठित राष्‍ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में तीन हजार से अधिक लेख एवं फीचर प्रकाशित। ब्‍लॉगर एवं स्‍तम्‍भकार। लगभग एक दर्जन पुस्‍तकों का लेखन एवं सहलेखन। दो दर्जन से अधिक प्रतिष्ठित सम्‍मान एवं पुरस्‍कारों से अलंकृत। 

Disclaimer: The views expressed in this article are solely those of the author and do not represent the views of Ayra or Ayra Technologies. The information provided has not been independently verified. It is not intended as medical advice. Readers should consult a healthcare professional or doctor before making any health or wellness decisions.
Category:Health and Wellness


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Written by राजेश कश्‍यप

वरिष्‍ठ पत्रकार, लेखक एवं समीक्षक (स्‍वतंत्र)