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नारी तेरे कितने रूप

नारी तेरे कितने रूप ?

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11 Jun '24
6 min read


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आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में घर और परिवार ही वो जगह और लोग हैं जहां आदमी को सुकुन नसीब होता है , पूरा दिन संघर्ष करके जब इंसान घर लौटता है तो उसे मां की गोद में सुकुन और मां के बाद पत्नी से प्यार भरी दो बातें सारे दिन की थकान मिटा देती है , लेकिन ये बातें सभी पत्नियों पर लागू नहीं होती ।

अब आप पूछोगे क्यु ? भी अभी तो आपने कहा की दिन भर की थकान मां की गोद और पत्नी की प्यार भरी दो बातें मिटा देती है तो हां सही ही कहा है मैंने ….! 

आज ऑफिस से घर आकर मैंने जब अपनी पत्नी को मुस्कुराते देखा तो मुझे मेरे दोस्त की बात याद आ गई , उसकी बात याद करके लगा क्या सच में किसी नारी का ऐसा स्वरूप हो सकता है , आज तक तो हमने कितनी ही नारियों की कहानियां और कथाएं सुनी है जिसने पुरूषों के जीवन को नई राह देने में अहम भूमिकाएं निभाई हैं ।

ये सब सोच में एकटक अपनी पत्नी को देख रहा था , मुझे इस तरह खुद को निहारता देख वो मुस्कुराते हुए मेरे पास आई और बोली -" क्या बात है जनाब , आज दरवाजे पर ही खड़े रहकर निहारते हुए रहना है या अंदर भी आना है ।" 

उसके इस अंदाज पर मैं मुस्कुरा उठा , मैं अंदर अपने कमरे में आया और फ्रेश होकर हॉल में आकर बैठ गया , हर रोज की तरह मेरी पत्नी हाथ में चाय और नाश्ते की ट्रे लिए आई और मुझे देते हुए आज पूरे दिन का हाल पूरा , बस एक यही पल होता है जिंदगी में जब मुझे लगता है कि मेरे जितना सुखी इंसान शायद ही कोई हो ….! हा हा हा …. ! मजाक कर रहा था मैं सच में खुशनसीब समझ रहा था जब फिर मेरे दोस्त की बात मेरे दिमाग में कौंध गई थी।

मेरी पत्नी प्रभा , मुझे फिर खुद को निहारते देख पूछ बैठी -" क्या बात है आप ऐसे बार बार मुझे क्यु देख रहे हैं आज मैं तो आज कोई श्रृंगार भी नहीं की हूं ।" 

उसकी बात सुनकर मैं उससे बोला -" प्रभा तुम्हें श्रृंगार की जरूरत ही नहीं है तुम्हारा दूसरों के लिए प्यार और व्यवहार ही मेरे लिए तुम्हारा श्रृंगार है इतने वर्ष बीत गए हमारी शादी को अब तो कुछ दिनों में हमारी शादी की भी अट्टठाइसवी सालगिरह आने वाली है फिर भी पता ही नहीं चला की इतने साल हमने यूं ही हंसी खुशी प्यार से हर सुख दुख को , परेशानी को मिटाकर बिता लिए ।" 

आप ऐसी बात कर रहे हैं जो पहले कभी नहीं की, क्या कोई बात है जो आप मुझे बता सके , प्रभा बोली ।

 

आज अपने दोस्त से मिला मैं , बहुत  अरसे बाद । जानती हो मस्तमौला सा वो इंसान आज बहुत दुखी और उदास सा था उससे बात करने पर उसने बताया इसका कारण उसकी पत्नी है मैं सच मैं हैरान रह गया उसकी बात सुनकर, मैंने रमीला भाभी को देखा था मुझे व्यवहारगत वो बहुत अच्छी लगी थी , लेकिन जो मेरा दोस्त बंता रहा था उसे सुनकर मुझे ऐसा लगा जैसे मैं रमीला भाभी को जानता ही नहीं था , रवि और मैं हम दोनों साथ नौकरी में लगे थे , मेरी शादी से पहले ही रवि की शादी हो गई शादी के लगभग एक साल बाद ही उसने ट्रांसफर ले लिया दूसरे शहर में , उसके बाद हम आज मिले ।

रवि ने बताया कि उसने ट्रांसफर भी रमीला भाभी के कहने पर ही लिया था , रमीला भाभी उसके मां और पिता के साथ नहीं रहना चाहती थी आए दिन कलह करती थी ,उसके माता-पिता की इकलौती संतान होने के बाबजूद भी बेटे का घर बर्वाद ना हो इसलिए उन्होंने उसे अपने से दूर जाने दिया , लेकिन ये सिलसिला दूर जाने के बाद भी नहीं रूका दूर जाने के बाद भी उन्होने उसके मां पिता से मिलने यहां तक बात करने के लिए भी मना कर दिया , इस दुख में उसके माता-पिता एक दिन स्वर्ग सिधार गए , वो उसके माता-पिता के अंतिम संस्कार करने के लिए भी जाने नहीं दे रही थी लेकिन उसके बाबजूद भी वो झगडा करके गया और अंतिम संस्कार पूरा कर जब वो लौटा तो पुलिस वाले उसे शारिरिक और मानसिक प्रताडना के इल्ज़ाम में उसे जेल में डाल दिया , जब उसे पता चला उसकी पत्नी ने ही ये इल्ज़ाम उस पर लगाया है क्योंकि वो उसके खिलाफ गया था , उसने उससे मिन्नतें की , अपने बेटे की दुहाई दी लेकिन रमीला भाभी को जरा भी तरस नहीं आया । उनके कारण रवि को सात साल की सजा हुई उसकी नौकरी भी छूट गई , दो साल पहले वो जेल से बाहर आया तो उसे मालूम हुआ रमीला भाभी उसका और उसके मां पिता की सारी जायदाद बेचकर कहीं चली गई है , तब से आज तक वो बेचारा इधर उधर थोड़ा बहुत काम करके अपना गुजारा कर रहा है आज जब उसकी ऐसी स्थिति देखी तो मेरे मन में विचार आया कि क्या सच में एक स्त्री ,  एक पत्नी इतनी निष्ढठुर हो सकती है क्या नारी का वो प्रेम और ममत्व से विलग ऐसा भी स्वरूप हो सकता है ।

प्रभा मेरी बात को सुनकर मुस्कुराई और बोली -" आपने अब तक की जिंदगी में केवल प्रेम और समर्पण वाली स्त्रियां ही देखी है , लेकिन इसका मतलब ये नहीं की जो और जितना हम दुनिया में देखते हैं केवल वही सारी दुनिया होती है दुनिया स्वार्थ और अहंकार से भरी है आज आपने केवल एक का जिक्र सुना इसलिए आपको विश्वास नहीं हुआ लेकिन ऐसे बहुत से लोग हैं जो आपकी सोच से अलग है ।" 

उसकी बात सुनकर मैंने सिर हिला दिया क्योंकि अब मुझे भी यकीन हो गया कि नारी तेरे कितने स्वरूप है उनमें एक स्वार्थी भी ।

मैं अपने आपको को बहुत खुशनसीब समझता हूं कि मुझे प्रभा जैसी नेक और समझदार पत्नी मिली जिसने मेरे घर परिवार को अपने प्यार से सींचा और उसे महकाया ।

 

 हमारी चाय खत्म हुई , तो सोचा बड़े दिनों बाद दोनों साथ में आज ढलता हुआ दिन और चढ़ती हुई शाम का अनुभव करें , हम दोनों एक दूसरे का हाथ थामे जिंदगी को धन्यवाद देते हुए साथ चल पड़े ।

 

धन्यवाद ! 

 

Category:Stories


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Written by Poonam Yadav