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सात्विक डाइट व सात्विक लाइफस्टाइल को फॉलो कर रहें स्वस्थ्य एवं निरोगी

सात्विक डाइट के फायदे

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07 Oct '23
12 min read


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नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी का सात्विक डाइट से जुड़े इस महत्वपूर्ण ज्ञानवर्धक आर्टिकल में

आधुकनिकता के इस दौर में आज लोगों की व्यस्ततम दिनचर्या के बीच शरीर को स्वस्थ्य बनाये रखना लोगों के लिए एक चैलेंज सा बन गया है, लोगों का डाइट आज health conscious नही बल्कि taste conscious हो गया है।

Fast जीवन शैली में झटपट बनने वाली fast food लोगों को ज्यादा पसंद है तेल मसालेदार spice खाना लोगों को ज्यादा पसंद है। घर की जगह बाहर का खाना लोगों को ज्यादा पसंद है जिस वजह से आज लोगों का शरीर तरह तरह की बिमारियों का घर बनता जा रहा है।

आज डब्बा बंद, पैकेट बंद चीजें खाकर लोगों का स्वास्थ्य दिन ब दिन बिगड़ता जा रहा है। जिस वजह से बीमार शरीर को ठीक करने में ठीक रखने में लोगों के इनकम का बहुत बड़ा हिस्सा चला जा रहा है।

आयुर्वेद और योग साहित्य में भोजन को तीन कटेगरी में बांटा गया है।

सात्विक

राजसिक

तामसिक

आज के इस आर्टिकल में हम सात्विक डाइट से जुडी महत्वपूर्ण बातों पर प्रकाश डालेंगे

सात्विक शब्द संस्कृति के सत्व से लिया गया है जिसका अर्थ होता है शुद्ध, सच्चा, नैतिक, स्वक्ष, मजबूत, बुद्धिमान, ऊर्जावान, जीवित, अती आवश्यक

शुद्ध शाकाहारी पौष्टीक भोजन को सात्विक भोजन कहते हैं।

सात्विक डाइट में वह सभी चीजें आती हैं जो हमें पेड़ पौधो से डायरेक्ट प्राप्त होती हैं जैसे की अनाज, हरी-पत्तेदार सब्जियाँ, फल, ड्राई fruits या फिर गाय का दूध, या उससे बने घी, मट्ठा, दही, मक्खन इत्यादि, इसमें बहुत ही कम तेल मसालों का प्रयोग होता हैं जिससे यह शरीर मन दिमाग़ के लिए काफ़ी फायदेमंद होता हैं 

सात्विक डाइट में सिर्फ सात्विक भोजन ही नही बल्कि सात्विक दिनचर्या भी शामिल है।

क्योंकि अगर दिनचर्या तामसिक हो और आहार सात्विक ले तो भी इसका जो वास्तविक फायदा मिलना चाहिए वह नही मिलता जैसे की रोज सुबह अमृतवेले उठना, मैडिटेशन करना, योगा प्राणायाम करना, spiritual content consume करना, अपने हॉबी की चीजें सुबह सुबह अभ्यास करना, जैसे अगर गाने का शौक हो तो नियमित सुबह अभ्यास कर अपने टैलेंट को निखारना, reading या writing का शौक हो तो वह करना फिर समय पर नास्ता करना समय पर दोपहर का भोजन करना समय पर रात का भोजन करना समय पर सोना समय पर जागना, अच्छे संग करना, tv से दुरी बनाना, केवल positive content consume करना इस तरह से सात्विक दिनचर्या को फॉलो करना और फिर साथ में सात्विक डाइट को अपनाना तब इसका वास्तविक लाभ जीवन में महसूस होगा।

अन्यथा जब मन आया खाया जब मन किया सोया, जो मन किया करा इस तरह की दिनचर्या रखकर कितना भी सात्विक डाइट खाते रहें उससे जो वास्तविक लाभ मिलना चाहिए वह नही मिलता, पहले के लोग की उम्र ज्यादा रहती थी और पहले लोग लम्बी उम्र तक स्वास्थ्य और निरोगी रहते थे, जिनमें से आज भी कुछ लोग हमारे बिच दिख जाते हैं जो लम्बी उम्र तक जीते हैं, जिनके बाल तक नही पके होते जिनकी दांत भी सही सलामत होते हैं, और एक आज की पीढ़ी है जिसमें से अधिकांश के बाल जवानी में ही झड़ जा रहे हैं, उम्र से पहले बुढ़ापा नजर आ रहा है, मनोबल बिल्कुल टुटा हुआ कोई भी कार्य करने के पहले सारे negative चीजें पहले सोचेंगे, कहते हैं अन्न का सीधा सीधा प्रभाव तन पर पड़ता है साथ ही हमारी जो दिनचर्या होती है उसका भी सीधा असर हमारे जीवन पर पड़ता है।

अगर हम तामसिक भोजन करते हैं तो हमारे विचारों की क्वालिटी भी तामसिक होगी, अगर हम तामसिक भोजन करते हैं तो हमारे negative emotions हमारे बेहेवियर में ज्यादा reflect होंगे, अगर हम सात्विक डाइट लेते हैं तो हमारे विचारों की क्वालिटी भी सतुगुणी होती है सात्विक डाइट से हमारे positive emotions हमारे बेहेवियर से reflect होने लगते हैं, क्योंकि वैसे भी जो सुबह उठता है और सुबह की आबो हवा प्राण ऊर्जा अपने भीतर लेता है उसका mind काफ़ी stable और पॉवरफुल बनता है वहीं देर से सोने और देर से उठने वाले सुबह के आबो हवा से वंचित रह जाते हैं जिसकी वजह से उसके negative emotions उसके बिहेवियर में ज्यादा reflect होने लगते हैं, उनके विचारों की क्वालिटी भी negative होती है मतलब हम मां प्रकृति के द्वारा निर्धारित दिनचर्या को खानपान को जितना फॉलो करते हैं हमारे जीवन में उतना पॉजिटिविटी बढ़ती है और जितना पॉजिटिविटी बढ़ती जाती है हम उतने सफल बनते जाते हैं।

सात्विक डाइट में शरीर के लिए जरुरी तमाम पोषक तत्व प्रचूर मात्रा में होते हैं जैसे की protein, vitamin, fat, carbohydrate, antioxidant, minerals इत्यादि।

आइये जानते हैं सात्विक भोजन के फायदे:-

सात्विक भोजन के फायदे-

  1. सात्विक डाइट से बिमारियों का खतरा कम होता है।
  2. सात्विक डाइट से मानसिक स्वास्थ्य पर असर
  3. सात्विक डाइट से immunity power बढ़ती है
  4. सात्विक डाइट सुपाच्य होता है
  5. वजन को संतुलित रखने में मददगार

सात्विक डाइट से बिमारियों का खतरा कम होता है - क्योंकि सात्विक डाइट में हरी सब्जियाँ, फल, अनाज, अंकुरित चीजें शामिल होती हैं साथ ही समय पर सोना, उठना, खाना, योगा, मैडिटेशन भी सम्मिलित होता है. अगर बात करें बिमारियों की तो बिमारियों की मूल वजह इंसान की डाइट और लाइफस्टाइल ही होती है अगर डाइट सुधार लिया जाये और लाइफस्टाइल को ठीक कर लिया जाये तो बिमारियों से हम बच सकते हैं।

 

सात्विक डाइट से मानसिक स्वास्थ्य पर असर - सात्विक खानपान का मन पर सीधा असर पड़ता है। कहा भी गया है जैसा अन्न वैसा मन, अगर हम सात्विक डाइट लेते हैं तो इससे हमारी बुद्धि पर और मन पर सीधा सीधा असर पड़ता है सात्विक डाइट केवल तन के लिए नही बल्कि मन के लिए भी लेना होता है मतलब हो जो पढ़े, सुने, देखे वह content भी सात्विक हो तब जाकर हमारे विचारों में सात्विकता आती है। और जैसे जैसे हमारे विचार सात्विक होते जाते हैं विचारों का असर हमारे जीवन में नजर आने लगता है क्योंकि विचार तो बीज हैं

सात्विक डाइट से immunity power बढ़ती है - जब शरीर की immunity power week हो तो छोटी छोटी बीमारियां भी शरीर को परेशान करती है, क्योंकि शरीर में रोगों से लड़ने की शक्ति नही होती, लेकिन जब हम अपना immunity power बढ़ा लेते हैं, तो हमारा शरीर हर तरह के germs bacteria fungus से लड़कर शरीर को बिमारियों से प्रोटेक्ट कर लेता है। सात्विक. डाइट लेने से बॉडी की immunity power strong होती है, क्योंकि सात्विक डाइट में हरी सब्ज़ीयां, ताजे fruits, ड्राई fruits, अंकुरित चीजें, अनाज शामिल होती हैं जो की शरीर के लिए फायदेमंद होती हैं। हरी सब्जियों से फलो से या अंकुरित चीजों से शरीर को जरुरी पोषक तत्व प्रचूर मात्रा में मिल रहे होते हैं जिससे शरीर की हर cells healthy और strong बनी रहती है जो बाहरी इन्फेक्शन से बॉडी को प्रोटेक्ट करती है इसके साथ ही blood में जो RBC होती है वह भी सात्विक खानपान की वजह से काफ़ी पॉवरफुल बन जाती है और Rbc का काम होता है हमारे बॉडी में inter करने वाले सभी germs bacteria या fungus से फाइट करके बॉडी को प्रोटेक्ट करना।

सात्विक डाइट सुपाच्य होता है - आमतौर आज की दिनचर्या में इंसान ज्यादातर जो चीजें खाता पिता है उसमें केमिकल मिले होते है और नॉनवेज तो शरीर के लिए बना ही नहीं है यह सब चीजें हमारी बॉडी को डाइजेस्ट करने में बड़ी दिक्क़तों का सामना करना पड़ता है। लेकिन चुंकि मां प्रकृति नें मानव शरीर को जीवित रखने के लिए जो जीवित भोजन उपलब्ध करवाएंगे हैं वह हमारे शरीर के लिए काफ़ी friendly होता है वह बड़ी आसानी से डाइजेस्ट हो जाता है जिससे पेट से जुडी प्रॉब्लम जैसे कब्ज गैस्ट्रीक वगैरह की दिक्क़त नहीं आती

वजन को संतुलित रखने में मददगार - जहाँ अत्याधिक दुर्बलता शरीर के लिए घातक है वहीं अत्याधिक मोटापा भी शरीर के लिए नुकसानदेह है, सात्विक डाइट लेने से बॉडी weight mantain रहता है क्योंकि इसमें फाइबर युक्त शाकाहारी भोजन शामिल होते हैं पर अगर fat लेते भी हैं तो सात्विक डाइट में सात्विक दिनचर्या भी शामिल होती है और सात्विक दिनचर्या में योगा, प्राणायाम भी शामिल होते हैं।

सात्विक डाइट स्किन के लिए फायदेमंद- सात्विक भोजन में साबुत अनाज, मौसमी फल, सब्जियां शामिल होते हैं यह सभी चीजें प्रोटीन, विटामिन, एंटीक्सीडेंट, मिनरल समेत कई पोषक तत्वों से भरपूर होते है जो dead स्किन को बाहर निकालने और new cells को बनाने में मददगार होते हैं जिससे स्किन  ग्लोइंग बनती है, इसके सेवन से शरीर के भीतर जो टॉक्सिंस होते हैं वह शरीर से अच्छी तरह बाहर निकलते हैं जिससे शरीर का डिटॉक्स अच्छी तरह से होने से स्किन healthy बना रहता है।

सात्विक डाइट से जुडी कुछ खास बातें -

  • जब टेंशन में हों, जल्दी में हों, गुस्से में हों तो ऐसे मनोस्थिति में भोजन नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसे मन से किए गए भोजन में भी मन के वाइब्रेशन जाते हैं और शरीर के अंग अंग में वह भोजन पहुंचता है और cells को बिमार करता है, इसलिए भोजन करने से पहले एक मिनट परमात्मा को याद करके मन को बिल्कुल शांत करके अच्छे से बैठकर भोजन करना चाहिए
  • भोजन करते वक़्त बात नहीं करनी चाहिए या टीवी नहीं देखना चाहिए चबा चबा कर खाना चाहिए, आज लोग चबा चबा कर भोजन नहीं करते हड़बड़ी में भोजन करते हैं जिसकी वजह से पेट से जुडी तरह तरह की प्रॉब्लम होती है, मुंह में दांत मिले हैं भोजन को चबाने के लिए लेकिन दो तीन बार चबाने के बाद आज लोग भोजन निगल लेते हैं जिससे पेट में अंतड़ियों को अत्यधिक मेहनत करनी पड़ती है जिससे पेट से जुड़े प्रॉब्लम उत्पन्न होते हैं।
  • अगर सात्विक अन्न ले रहे हैं तो योगा प्राणायाम या अन्य तरह के व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करना चाहिए जिससे की भोजन से जो ऊर्जा मिली वह utilise होती रहे अन्यथा शरीर में टॉक्सिंस जमा होने लगते हैं।
  • अगर कोई बुजुर्ग है तो उसे नियमित टहलना चाहिए जिससे की शरीर स्वस्थ्य बना रहे।
  • हम जो भोजन करते हैं यह विशेष ध्यान रखना चाहिए की हम मौसम, स्थान और समय के अनुसार ही भोजन करें। इसलिए कुछ सब्ज़ीयां या कुछ फल एक विशेष मौसम में ही मिलते हैं ताकि शरीर को उस मौसम के अनुकूल ढाला जा सकें, वहीं रात को heavy भोजन नहीं करना चाहिए, सुबह नास्ते में heavy भोजन नहीं करना चाहिए, दोपहर में भी जितनी भूख उतनी ही भोजन करना चाहिए, जब की आज लोग यह सोचते हैं की दिन भर काम करना हैं नास्ते में heavy नास्ता कर लेते हैं, रात को सोने से भोजन heavy भोजन कर लेते हैं।
  • वैसे तो आयुर्वेद के अनुसार सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए तो बेहतर होगा की अगर fit रहने की ठान ही चुके हैं तो इस दिनचर्या को शामिल करें
  • हमें भोजन करते वक़्त पानी नहीं पीना चाहिए बल्कि भोजन करने के आधे या एक घंटे पहले या एक घंटे बाद ही पानी पीना चाहिए। क्योंकि भोजन करने के बाद हमारे पेट में भोजन को पचाने के लिए एसिड का सेक्रेशन होता है खाने खाने के बाद तुरंत पानी पिने से भोजन के पाचन में प्रॉब्लम आता हैं। जिससे health पर भी प्रभाव पड़ता हैं 
  • हमें रोजाना एक ही समय पर भोजन करना चाहिए भोजन के समय में फेरबदल नहीं करते रहना चाहिए क्योंकि फिर हमारे पेट में उसी वक़्त रोजाना एसिड secretion शुरू हो जाता हैं और भोजन पेट में ना जाने से वह एसिड शरीर को नुसान पहुंचाता है
  • हमें नियमित दिनभर में इतना शारीरिक काम अवश्य करना चाहिए कि हमें रोज शाम को थकावट महसूस हो। इससे एक तो हमें भूख अच्छी लगेगी और दूसरा हमें नींद भी अच्छी आएगी
  • हमारे शरीर 70% जल और 30% सॉलिड से मिलकर बना है। इसलिए हमें भोजन में 70% चीजें ऐसी शामिल करनी चाहिए जो रसयुंक्त हो जैसे सब्जी या फल या सलाद और 30% ऐसे चीजें शामिल करनी चाहिए जो सूखा राशन हो जैसे की दाल, चावल या गेंहू बाजरा इत्यादि का आटा
  • नास्ते में अंकुरित चीजें लेना पेट के लिए एवं स्वास्थ्य के लिए काफ़ी फायदेमंद होता हैं।
  • सात्विक डाइट में राजसिक या तामसिक डाइट शामिल नहीं करना चाहिए अन्यथा इसका फायदा नहीं मिल पायेगा

दोस्तों मां प्रकृति नें मानव शरीर को नॉनवेज खाने के लिए गढ़ा ही नही है, मानव शरीर तो पूरी तरह से वेजिटेरियन भोजन के लिए design किया गया है। अब जितना हम कुदरत के द्वारा बनाये नियमों के साथ चलेंगे हम उतने सुखी बनेंगे, जितना हम प्रकृति से व उसके द्वारा निर्धारित दिनचर्या से जुड़ेंगे हम उतने स्वस्थ्य व निरोगी रहेंगे

अक्सर सात्विक का अर्थ लोग uncooked food समझ लेते हैं, अब इसका अर्थ यह नहीं की जो चीजें पकाकर खाने को बनी हैं उसे भी इसी तरह खाया जाये जैसे अनाज इत्यादि, यह सच है की मां प्रकृति जिन चीजों को जिस रूप में उपलब्ध करवाती है उसके पीछे कुछ मकसद यही होता हैं की वह उस रूप में वह पूर्ण होती हैं

मतलब हमारे शरीर के लिए जितने प्रकार के nutrients उस मौसम में चाहिए होते हैं वह चीजें प्रकृति उस सब्जी या फल में प्रचूर मात्रा में उपलब्ध कराती हैं हमें उसमें से एक्स्ट्रा fat एक्स्ट्रा protien अलग करने की जरूरत नहीं। जैसे की आज सोयाबीन से तेल अलग कर सोयाबीन बड़ी खाई जाती हैं और तेल को कई तरह के प्रोसेस से गुजारकर रिफाइंड करके उसकी गुणवत्ता खत्म कर दी जाती हैं। पानी को मशीनों से फ़िल्टर करने के नाम पर उसके सारे minerals उससे अलग कर दिए जाते हैं। दूध से fat अलग करके पिया जाता हैं जिससे दूध की गुणवत्ता खत्म हो जाती हैं। जैसे गुण या मधुरस मिठास के लिए ठीक हैं पर सफ़ेद चीनी स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं

 

निष्कर्ष

दोस्तों आशा करते हैं की सात्विक डाइट एवं सात्विक लाइफस्टाइल से जुडा आज का यह आर्टिकल आप सभी के लिए काफ़ी फायदेमंद साबित होगा, अगर आप किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं तो आपको सात्विक डाइट और सात्विक लाइफस्टाइल फॉलो करना चाहिए 

 

 

Category : Food and Cooking


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Written by uday choudhary

Motivational speaker, life coach, counselor, writer